Fresh mind

तनाव मुक्ति के उपाय

जरुरत अनुसार पानी का कीजिए
उपयोग |
जल वचाव मे आपका होगा सहयोग ||
देश को अगर हो बचाना |
पानी होगा आपको बचाना ||

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मनुष्य के लिए तनाव से,मुक्त रहना अत्यंत आवश्यक है । यदि ऐसा नहीं किया जाता तो इसका घातक प्रभाव पड़ता है । इस अध्याय मेंब कुछ ऐसे उपाय दिए जा रहे हैं जो शरीए तथा मस्तिष्क को आराम देने में अत्यंत करगर हैं ।

लंबी सांस लेना –
अत्यधिक तनाव के क्षणों में धीमी और लंबी सांस लीजिए । इसके लिए पहले पेट को फुलाइए फिर उसमें एकत्रित सांस को ऊपर की ओर खिसकाइए । ऐसे में सांस छोड़े बिना फूले हुए पेट को पिचकाने की जरुरत पड़ती है । अब सांस को कुछ क्षण अंदर रोके रखिए , फिर धीमी गति से सांस बाहर छोड़ दीजिए । सांस लेने और छोड़ने में नाक का इस्तेमाल करें । सांस छोड़ने के पश्चात सुखपूर्वक बैठ जाइए । थोड़ी देर बाद आप पूरी तरह तनाव से मुक्त हो जाएंगे ।

ठहाके लगाना –
एक खुला ठ्हाका मारकर बड़े से बड़े तनाव में कमी ला सकते हैं । अनुसंधानों से पता चला है कि हंसी के ठहाके लगाने से मस्तिष्क रोग निवारक प्राकृतिक स्राव छोड़ता है । इससे तनाव को दूर करने में सहायता मिलती है।

विश्राम करना –
सर्वप्रथम आंखे बंद करके बैठे जाइए । इसके बाद सांस अंदर खींचिए और उसे ६ सेकंड तक रोके रखिए । इस बीच मांसपेशियों में यथासंभव तनाव पैदा कीजिए । फिर धीरे – धीरे सांस बाहर निकालिए और पूरे शरीर को ढीला छो‌ड़ दीजिए । लगभग २० सेकंड तक लयबध्द ढंग से सांस लीजिए और छोड़िए । उपरोक्त प्रक्रिया को दो बार दोहराइए । तीसरी बार ऐसा करने के बाद एक मिनट तक किसी आनंददायी विषय पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए पूर्णत: विश्राम कीजिए । इस प्रयोग से भी मानसिक तनाव दूर हो जाएगा ।

ठंडा जल पीना –
काम खत्म होने के बाद कोई पेय पदार्थ लेने के बजाय थंडा जल या फलों का रस पीजिए । इसके बाद १० मिनट तक किसी शांत स्थान पर आंखें मूंदकर बैठे रहिए । इससे भी मानसिक तनाव का शीघ्र ही निवारण हो जाता है ।

धीमा संगीत सुनना –
कुछ बिशेषज्ञों का कहना है कि धीमा – मधुर सिगीत बहुत अच्छा तनावरोधी है । अतः इसके लिए शास्त्रीय संगीत सुनना सर्वश्रेष्ठ है । इससे भी तनाव दूर हो जाता है ।

खाली समय निकालना –
कामकाज के बीच अपने लिए भी थोड़ा समय निकालिए । अगर आपके पास अपने लिए समय नहीं है आप सदा तनावग्रस्त ,चिड़चिड़े एवं चिंतित रहेंगे । अपने लिए समय निकालने से भी मनुष्य मानसिक तनाव को दूर करने में सफल को जाता है ।

Vijay tiwari

Jo karo soch samjh kar karo

जो करो सोचकर करो

एक बार एक विषैला सांप नदी के किनारे लेटा धूप का आनंद ले रहा था कि तभी न जाने कहां से एक काला कौआ उसके ऊपर झपटा और उसे अपने पंजों में दबाकर आकाश में उड़ गया । सांप बुरी तरह ऐंठ कर खुद को कौए के पंजों से छुड़ाने का प्रयत्न करने लगा , मगर लाख प्रयास करने पर भी सफल नहीं हुआ । यह देखकर सांप ने गुस्से से फुंफकारते हुए कौए के शरीर में अपने जहरीले दांत गाड़ दिए । कुछ ही क्षणों में जहर का प्रभाव दिखने लगा । काला कौआ दर्द से फड़फड़ाता हुआ आकाश से धरती पर आ गिरा । सांप मरते हुए कौए के पंजों से निकल कर भग गया । कौआ अब मौत के दरवाजे पर खड़ा था सांप का जहर उसके शरीर में हर ओर फैल चुका था ।

मरने से कुछ क्षण पहले उसने सोचा -‘आह ! क्या मुझे पहले नहीं सोचना चाहिए था ?
यह मेरी भूल थी कि मैंने बिना सोचे -विचारे एक जहरीले सांप को उठा लिया । वही सांप आखिर मेरी मौत का कारण बना । ‘

निष्कर्ष : समझदार सोचकर करते हैं ,मूर्ख करके सोचते हैं ।

shoot me with camera dont
shoot me with gun

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Vijay tiwari

Kiske liye kya mulyavaan hai

किसके लिए क्या मूल्यवान है

एक बार एक मुर्गा भोजन की तलाशकर रहा था । भोजन तलाश करने के दौरान हि एक कूड़े के ढेर में उसे एक बड़ा -सा हीरा मिला । उस हीरे को दिखकर वह आश्चर्य में पड़ गया । फिर उसने उसे चोंच में भर कर तोड़ना चाहा , परंतु भला हिरा कैसे टूट्ता । तभी उसके इर्द -गिर्द दूसरे मुर्गे भी जमा हो गए और कौतूहलवश उस हीरे के टुकड़े को देखने लगे। उन्हीं मेंएक दूसरा अनुभवी मुर्गा भी था। वह हीरे के पास आया और ध्यानपूर्वक उसका निरीक्षण किया । इसके बाद उसने किसी ज्ञानी की भांति कहा – ” मेरे प्यारे बच्चो ! तुम नहीं जानते , यह हीरे का बेकार टुकड़ा है । एक चमकता हुआ पत्थर भर है,जिसका हमारे लिए कोई मूल्य नहीं । हम इससे अपनी भूख नहीं मिटा सकते । अगर यही हीरा किसी जौहरी को मिला होता तो यह उसके लिए लाखों रुपयों का होता । हमारे लिए तो जौ और मक्का इस चमकते हुए हीरे से अधिक मूल्यवान है ।”
यह सुनकर उस मुर्गे ने हीरा वहीं कूड़े के ढेर पर छोड़ दिया और आगे भोजन की तलाश में बढ़ गया ।

निष्कर्ष : हर वस्तु हर प्राणी के लिए मूल्यवान नहीं होती ।

Apane Liye Sabkuchh Paya, Sabkuchh Khoya
Lekin kabhi na socha ye Jo Mila hai Vo to hamaree
Prakruti Ki Den Hai,,
Chalo Unke Liye Bhi Kuchh Kare …Save Tree,
Save….bird….Save…Water….
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Vijay tiwari

Chamgadad aur shikari

चमगादड़ और शिकारी एक बार एक शिकारी ने एक चमगादड़ को पकड़ लिया । वह ” कृपया मेरी जान बख्श दो ! मेरे छोटे -छोटे बच्चे घर पर मेरी प्रतीक्षा कर रहे होगें । मुझ पर दया करो । ” “बिलकुल नहीं। ” शिकारी बोला -” मैं पक्षियों पर दया नहीं करता । ” ” परंतु मैं पक्षी नहीं हूं । ” चमगादड़ ने कहा – ” मेरा शरीर देखो । मैं देखने में चूहा लगता हूं । “, ” हूं ! ” शिकारीने चमगादड़ को ध्यान से देखा और उसे छोड़ दिया । दुर्भग्यवश कुच दिनों बाद उसी चमगादड़ को किसी दूसरे शिकारी ने पकड़ लिया । ” कृपया मुझे जान से मत मारिए ! ” चमगादड़ घिघियाया– ” मेरे ऊपर दया दृष्टि कीजिए । ” ” बिलकुल नहीं ! ” शिकारी ने जवाब दिया–” मैं चूहों पर दया नहीं करता । ” ” पर क्षीमान मैं चूहा नहीं हूं । ” चमगादड़ बोला –” आप मेरे पंखदेखिए । क्या चूहों के पंख होते हैं ? ” शिकारी ने उसकी बात सुनकर उसे छोड़ दिया । इस प्रकार उस चमगादड़ को दूसरीबार जीवंदान मिला ।

निष्कर्ष : चालाक लोग अपनी सुविधानुसार अपनादल बदल लेते

Jai kishan , jai jawan
Save agriculture, save future

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Vijay tiwari

Yatri aur saph

यात्री और सांप एक यात्री किसी गांव की सड़्क पर जा रहा था । कड़ाके की ठंड पड़ रही थी । अचानक यात्री ने रास्ते में झड़ियों के नीचे एक संप सर्दी से ठिठुरा हुआ देखा । उसका पूरा शरीर ठंड से ऐंठ – सा गया था और वह करीब – करीब मरणासन्न हो रहा था । यात्री दयावान था । उसने सांप को उठाकर अपनी कमीज की जेब में रख लिया, ताकि उसके शरीर की गरमी से सांप का शरीर गरम हो जए और उसे नया जीवन मिले । कुच देर तक तो सांप कमीज की जेब में बिना हिले -डुले पड़ा रहा। पांरतु धीरे – धीरेउस यात्री के शरीर की गरमी पाकर वह सजीव और चंचल हो उठा और शीघ्र ही असली रुप में आ गया । सांप धीरे – धीरे कमीज की जेब से होकर यात्री के शरीर पर ऊपर की ओर सरकने लगाऔर इससे पहले कि बेचारा यत्री कुछ समझ पाता सांप ने यात्री के सीने में अपने जहरीले दांत गाड़ दिए । यात्री चिल्ला उठा – ” आह! निर्दयी सांप , क्या यही मेरी दया का पुरी दया का पुरस्कार है? क्या मैं इसी योग्या था ? तुम भी उन्हीं कृतघ्न प्राणियों में से हो, जिनसे यह पुरासंसार भरा हुआ है और मैं उन सीधे – सादे लोगों में हूं , जिन्हें इस प्रकार के भलाई के कामों के लिए इस प्रकार जान से हाथ धोना पड़्ता है । ”

निष्कर्ष : निर्दयी से दया की आशा न करें।

Save forest ,save tree

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Vijay tiwari

Bhuri sangati

बुरी संगति का दण्ड एक बार एक किसान ने पक्षियों को पकड़ने के लिऐ अपने खेत में जाल बिछाया । जाल में बहुत से पक्षी फंसे । फंसे हुए पक्षियों में जंगली कौए तो थे ही , बेचारा एक कबूतर भी फंसा पड़ा था । वह बेचारा लगा किसान की मिन्न्तें करने -” ओह, मालिक आपने इन कौओं के साथ मुझे क्यों पकड़ लिया ?
कृपया मुझे छोड़ ही दीजिए । आप तो जांते हैं, मैं एक हानिरहित सीधा -सादा पक्षी हूं कि आप अपने सच्चे मित्र को हानि नहीं पहुंचाना चाहेंगे । ” ” मैं अच्छी तरह समझता हूं । ” किसान बोला – ” मैं जानता हूं कि तुम किसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते । तुम उनके मित्र हो,मगर तुम्हें भी उसका दण्ड भुगतना पड़ेगा । ” अब कबूतर को अपनी गलती का एहसास हुआ , मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी ।

निष्कर्ष : बुरी संगत से बचो , इसका फल भी बुरा होता है ।

Save tree
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Vijay tiwari

Thomas edison

महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन बेहद मेहनती एवं जुझारु प्रवृति के व्यक्ति थे । बचपन में उन्हें यह कहकर स्कूल से निकाल दिया गया कि वे मंद बुध्दि बालक हैं । उसी थॉमस एडिसन ने कई महत्वपूर्ण आविष्कार किए , जिसमें से बिजली का बल्ब प्रमुख है । उन्होंने बल्ब का आविष्कार करने के लिए हजारों बार प्रयोग किए थे तब जाकर उन्हें सफलता मिली थी । एक बार जब वे बल्ब बनाने के लिए प्रयोग कर रहे थे तभी एक व्यक्ति ने उनसे पूछा ,’आपने करीब एक हजार प्रयोग किए लेकिन आपने सारे प्रयोग असफल रहे और आपकी मेहनत बेकार हो गई, क्या आपको दुख नहीं होता?
एडिसन ने कहा, ‘ मैं नहीं समझता कि मेरे एक हजार प्रयोग असफल हुए हैं। मेरी मेहनत बेकार नहीं गई क्योंकि मैंने एक हजार प्रयोग करके यह पता लगाया है कि इन एक हजार तरीकों से बल्ब नहीं बनाया जा सकता । मेरा हर प्रयोग ,बल्ब बनाने कि प्रक्रिया हिस्सा है और मैं अपने प्रत्येक प्रयास के साथ एक कदम आगै बढता हूं । कोई भी सामान्य व्यक्ति होता तो वह जल्द ही हार मान लेता लेकिन थॉमस एडिसन ने अपने प्रयास जारी रखे और हार नहीं मानी । आखिरकार एडिसन कि मेहनत रंग लाई और उन्होंने बल्ल का आविष्कार करके पूरी दुनिया को रोशन कर दिया ।

यह थॉमस एडिसन का विश्वास ही था जिसने आशा की किरण को बुझने नहीं दिया ।

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Vijay tiwari